Home Hindu Fastivals विष्णु भगवान की कहानी – हिन्दुओ के व्रत और त्योहार

विष्णु भगवान की कहानी – हिन्दुओ के व्रत और त्योहार

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विष्णु भगवान की कहानी 

एक सेठ सेठानी थे। सेठानी विष्णु भगवान की पूजा करती थी लेकिन सेठ को अच्छा नहीं लगता था सेठ ने सेठानी को घर से निकाल दिया। वह चलते चलते जंगल में पहुंची वहां चार आदमी मिट्टी खोद रहे थे। सेठानी वहां जाकर बोली-भाई मुझे नौकरी पर रख लो। उन्होंने उसे नौकरी पर रख लिया। मिट्टी खोदने से सेठानी के हाथ में छाले पड़ गए। और सिर के बाल उड़ गए। वो आदमी बोले-बहन! तुम अच्छे घर की लगती हो तुम हमारे घर का काम कर दिया करो। वो उसे अपने घर ले गए वह रोज चार मुट्ठी अनाज लाते थे चारों बांटकर खाते थे। सेठानी बोली कल से आठ मुट्ठी अनाज लेकर आना। अगले दिन वो आठ मुट्ठी अनाज लाए। वे पड़ोसन से आग मांग लाई, भोजन बनाया और विष्णु भगवान को भोग लगाया फिर सबको भोजन परोसा। भाई बोले-बहन भोजन बहुत स्वाद है। 
बहन बोली-भगवान का झूठा है तो स्वाद तो होगा ही। उधर सेठ भूखा रहने लगा। सब बोले सेठानी के भाग का खाया करता था। सेठ सेठानी को ढूंढने के लिए निकल पड़ा। ढूंढते ढूंढते वह भी उसी जंगल में आ गया। वहां उसने उन्हीं चार आदमियों को मिट्टी खोदते हुए देखा। उसने कहा-भाई मुझे नौकरी पर रख लो। वे बोले हां भाई तू भी मिट्टी खोद ले। वह मिट्टी खोदने लग गया। उसके भी हाथ में छाल पड़ गए और सिर के बाल उड़ गए। वो आदमी बोले भाई तुम अच्छे घर के लगते हो तुम हमारे घर पर रह लो। वह उसे अपने घर में ले गए। वहां जाकर सेठ ने सेठानी को पहचान लिया। लेकिन सेठानी ने नहीं पहचाना क्योंकि वह घूंघट में रहती थी। सेठानी ने भोजन बनाया। विष्णु भगवान का भोग लगाया, सबको परोसने लगी। जब सेठ की थाली परोसने लगी तो विष्णु भगवान ने हाथ पकड़ लिया। भाई बोले-बहन ये क्‍या कर रही है। बहन बोली-भाई मैं तो कुछ भी नहीं कर रही मेरा तो विष्णु भगवान ने हाथ पकड़ रखा है। 
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भाई बोले-हमें भी अपने भगवान के दर्शन करवाओ। सेठानी ने भगवान से प्रार्थना करी। विष्णु भगवान ने सबको दर्शन दिए। सेठ ने सेठानी से माफी मांगी। भाइयों ने बहन को बहुत सा धन देकर विदा किया। सेठ सेठानी दोनों मिलकर विष्णु भगवान की पूजा करने लगे। उनके अन्न धन के भंडार भर गए। सक्रांत से कहानी का नेम लेवे एक साल तक कहानी कहकर विष्णु भगवान का पीला पीताम्बर। पाव गुड, सवा पांच रूपये। लक्ष्मीजी का श्रृंगार का सामान साड़ी ओर दक्षिणा देवें। 
 (विष्णु भगवान की जय ) 
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One Comment

  1. Zeytinburnu Nakliyeci

    September 18, 2023 at 1:34 pm

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