1 second read
0
0
72
भजन ध्वनि प्रभाति-२६
ढूंढ़ मैं हारा मेरे सतयुग,
मिला न दरश तुम्हारा। टेक
हरिद्वारा ।
गिरनाना।
संसार ।
बहुबारा ।
बहु संयम नियम अचारा ।
यामेश्वर जगदीश द्वारिका,
बद्रीनाथ
काशी मथुरा और अयोध्या,
टूढ़ा
गिरी
पूरब पश्चिम उत्तर दक्षिण,
परनाम |२
भटका
अरसठ तीरथ में फिर आया,
सब
दरश
हे तु
जप तप व्रत उपवास किये,
25 
Load More Related Articles
Load More By amitgupta
  • राग बिलाप-२७अब मैं भूली गुरु तोहार बतिया,डगर बताब मोहि दीजै न हो। टेकमानुष तन का पाय के रे…
  • राग परजा-२५अब हम वह तो कुल उजियारी। टेकपांच पुत्र तो उदू के खाये, ननद खाइ गई चारी।पास परोस…
  • शब्द-२६ जो लिखवे अधम को ज्ञान। टेकसाधु संगति कबहु के कीन्हा,दया धरम कबहू न कीन्हा,करजा काढ…
Load More In Uncategorized

Leave a Reply

Check Also

What is Account Master & How to Create Modify and Delete

What is Account Master & How to Create Modify and Delete Administration > Masters &…