0 second read
0
0
35
चेतावनी गजल ३८
बने जो कुछ धरम कर ले यही एक साथ जायेगा।
टेक
गया अवसर न तेरे फिर के हरगिज हाथ आयेगा।
दिवाना बनके दुनिया में समय अनमोल खोता है।
दिये लाखों की दौलत भी न बच रहने तू पायेगा।
पडी रह जायेगी सारी तेरी अकड़ ठिकाने पर।
अब आके यम जकड़कर गरदन पकड़ धर दबायेगा।
कुटुम्ब परिवार सुत कोई सहायक होगा न कोई।
तेरे पापों की गठरी खुद तू ही सर पर उठायेगा।
गरभ में था कहा तुमने, न भूलूंगा प्रभु तुझको।
भला तू जायके अपना उसे क्या मुंह दिखायेगा।
तुझे तो घर में जंगल में तेरा ही खुद व खुदी बेटा।
सुखाके लकड़ियों के ढेर में तुझको जलायेगा।
कहें कबीर समुझाई, कहना मान ले भाई।
नहीं तो अपनी ठकुरा बृथा सारी गंवायेगा।
Load More Related Articles
Load More By amitgupta
  • राग बिलाप-२७अब मैं भूली गुरु तोहार बतिया,डगर बताब मोहि दीजै न हो। टेकमानुष तन का पाय के रे…
  • राग परजा-२५अब हम वह तो कुल उजियारी। टेकपांच पुत्र तो उदू के खाये, ननद खाइ गई चारी।पास परोस…
  • शब्द-२६ जो लिखवे अधम को ज्ञान। टेकसाधु संगति कबहु के कीन्हा,दया धरम कबहू न कीन्हा,करजा काढ…
Load More In Uncategorized

Leave a Reply

Check Also

How to Check BUSY Updates

How to Check BUSY Updates Company > Check BUSY Updates Check BUSY Updates option provid…