1 second read
0
0
27
सन्त का रहनी भजन-५२.
रमता
करम आठ कोइला करि डारे,
जग
अरु
सो निज साधु है। टेक
काया मध्ये धूनी धधकाए,
रमै ।
दम्भ मान मद लोभ मोह से,
स न्यारा रहे।
कल्पना,
माया ममता इनके दर करे।
माया महा कठिन है हरि को,
ज्ञान
48
काशी।
भाई।
राम
आठा पहर टरे। साधु०/
हरे ।
बिराग 
Load More Related Articles
Load More By amitgupta
  • राग बिलाप-२७अब मैं भूली गुरु तोहार बतिया,डगर बताब मोहि दीजै न हो। टेकमानुष तन का पाय के रे…
  • राग परजा-२५अब हम वह तो कुल उजियारी। टेकपांच पुत्र तो उदू के खाये, ननद खाइ गई चारी।पास परोस…
  • शब्द-२६ जो लिखवे अधम को ज्ञान। टेकसाधु संगति कबहु के कीन्हा,दया धरम कबहू न कीन्हा,करजा काढ…
Load More In Uncategorized

Leave a Reply

Check Also

How to Check BUSY Updates

How to Check BUSY Updates Company > Check BUSY Updates Check BUSY Updates option provid…