0 second read
0
0
47
चाहे कमल नयन को,
दम
हर
केशर तिलक माला मोतियन की,
वृन्दावन
जेहि तन लागे वोहि तन जाने,
लोगन के
नेह लगाए त्याग दई तृष्णा सम,
उदासी।
वासी ।
हांसी ।
फांसी ।
मैं जैहों करअट काशी।
डाल गए
कहत कबीर सुनो भाई साधो,
रहे
की
Load More Related Articles
Load More By amitgupta
  • राग बिलाप-२७अब मैं भूली गुरु तोहार बतिया,डगर बताब मोहि दीजै न हो। टेकमानुष तन का पाय के रे…
  • राग परजा-२५अब हम वह तो कुल उजियारी। टेकपांच पुत्र तो उदू के खाये, ननद खाइ गई चारी।पास परोस…
  • शब्द-२६ जो लिखवे अधम को ज्ञान। टेकसाधु संगति कबहु के कीन्हा,दया धरम कबहू न कीन्हा,करजा काढ…
Load More In Uncategorized

Leave a Reply

Check Also

What is Account Master & How to Create Modify and Delete

What is Account Master & How to Create Modify and Delete Administration > Masters &…