Home Bio-Graphy “कोको शनेल: एक जीवन गाथा” (Coco Chanel: Ek Jeevan Gatha)

“कोको शनेल: एक जीवन गाथा” (Coco Chanel: Ek Jeevan Gatha)

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कोको चैनल, जिनका वास्तविक नाम गैब्रिएल बॉनहूर “कोको” चैनल था, का जन्म 19 अगस्त 1883 को फ्रांस के सॉमूर नामक शहर में हुआ था। उनके माता-पिता, यूजीन जीन डेवोले और अल्बर्ट चैनल, साधारण पारिवारिक पृष्ठभूमि से थे। कोको का बचपन कठिनाइयों और संघर्षों से भरा था। उनकी माँ की मृत्यु के बाद, उनके पिता ने उन्हें और उनकी बहनों को अनाथालय भेज दिया।

कोको ने अनाथालय में रहते हुए सिलाई करना सीखा। यह कौशल उनके जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया। अनाथालय छोड़ने के बाद, उन्होंने कपड़ों की दुकान में काम करना शुरू किया और साथ ही गाना भी सीखने लगीं। उन्होंने “कोको” नाम उस समय अपनाया जब वे कैफे और संगीत हॉल में गाने लगीं। यह नाम उनके द्वारा गाए गए गानों “Qui qu’a vu Coco” और “Ko Ko Ri Ko” से लिया गया था।

Coco Chanel

कोको चैनल ने 1910 में पेरिस में अपनी पहली टोपी की दुकान खोली, जिसे “चैनल मोड्स” के नाम से जाना जाता है। उनकी डिज़ाइन की गई टोपी साधारण और सुरुचिपूर्ण थीं, जो तेजी से लोकप्रिय हो गईं। 1913 में, उन्होंने अपना पहला कपड़ों का बुटीक ड्यूविल में खोला, और 1915 में बियारिट्ज़ में एक और बुटीक खोला।

1921 में, कोको चैनल ने अपनी मशहूर सुगंध “चैनल नंबर 5” लॉन्च की, जो आज भी एक प्रतिष्ठित ब्रांड बनी हुई है। यह पहली बार था जब किसी डिज़ाइनर ने अपनी खुद की सुगंध बनाई थी। चैनल की फैशन शैली ने महिलाओं को कोर्सेट से आज़ादी दिलाई और उनके लिए आरामदायक और आकर्षक कपड़ों का प्रचलन शुरू किया। उन्होंने छोटी काली पोशाक (लिटिल ब्लैक ड्रेस) को भी लोकप्रिय बनाया, जो आज एक क्लासिक फैशन स्टेटमेंट है।

द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान, चैनल ने अपने बुटीक बंद कर दिए, लेकिन युद्ध के बाद उन्होंने फिर से फैशन की दुनिया में वापसी की। 1954 में, उन्होंने पेरिस में अपना बुटीक फिर से खोला और एक बार फिर से फैशन इंडस्ट्री में धूम मचाई। उनका क्लासिक चैनल सूट, जिसमें कॉलरलेस जैकेट और अच्छी तरह से फिट होने वाली स्कर्ट शामिल थी, एक बार फिर से फैशन प्रेमियों के बीच लोकप्रिय हो गया।

चैनल का व्यक्तिगत जीवन भी काफी चर्चित रहा। उनके कई प्रेम प्रसंग थे, जिनमें ब्वॉय कैपेल, ड्यूक ऑफ वेस्टमिंस्टर और अन्य प्रमुख हस्तियां शामिल थीं। हालांकि उन्होंने कभी शादी नहीं की और न ही उनके कोई बच्चे थे, उनका जीवन उनके काम और उनकी स्वतंत्रता के प्रति समर्पित रहा।

कोको चैनल का 10 जनवरी 1971 को पेरिस में निधन हो गया। उनकी मृत्यु के बाद भी, चैनल ब्रांड अपनी प्रतिष्ठा बनाए रखते हुए फैशन इंडस्ट्री में एक प्रमुख नाम बना रहा।

कोको चैनल ने अपने साहस, नवीनता और आत्मविश्वास से फैशन की दुनिया में क्रांति ला दी। उनके डिज़ाइन और शैली ने महिलाओं को नई स्वतंत्रता और आत्मनिर्भरता का अनुभव कराया। उनकी कहानी संघर्ष, सफलता और संकल्प की एक प्रेरणादायक गाथा है, जो आज भी फैशन और जीवन शैली में उनकी विरासत को जीवित रखती है।

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