Home Bio-Graphy “फ्रिदा काहलो: एक जीवन गाथा” (Frida Kahlo: Ek Jeevan Gatha)

“फ्रिदा काहलो: एक जीवन गाथा” (Frida Kahlo: Ek Jeevan Gatha)

3 second read
0
0
31

फ्रिदा काहलो, 20वीं सदी की एक प्रतिष्ठित मैक्सिकन चित्रकार, का जन्म 6 जुलाई 1907 को मैक्सिको सिटी के पास कोयोकान में हुआ था। वे अपनी आत्मकथात्मक और संवेदनशील पेंटिंग्स के लिए जानी जाती हैं, जिनमें दर्द, पीड़ा और उनके जीवन के संघर्षों का प्रतिबिंब मिलता है। फ्रिदा का जीवन और कला दोनों ही उनकी व्यक्तिगत त्रासदियों, उनके देश के प्रति प्रेम और उनके जीवंत व्यक्तित्व का प्रतीक हैं।

फ्रिदा का जन्म एक मिश्रित जर्मन-मैक्सिकन परिवार में हुआ था। उनके पिता, गिलर्मो काहलो, एक जर्मन फोटोग्राफर थे, और उनकी मां, मटिल्डे कैल्डेरॉन वाई गोंज़ालेज़, मैक्सिकन थीं। बचपन में ही, फ्रिदा को पोलियो हो गया, जिससे उनकी दाहिनी टांग कमजोर हो गई और उन्हें जीवनभर लंगड़ाना पड़ा।

Self portrait

फ्रिदा की शिक्षा नेशनल प्रिपरेटरी स्कूल में हुई, जहां वे विज्ञान और कला में गहरी रुचि रखती थीं। उन्होंने चिकित्सा की पढ़ाई शुरू की, लेकिन 1925 में एक भयानक बस दुर्घटना ने उनके जीवन को बदल दिया। इस दुर्घटना में उन्हें गंभीर चोटें आईं और कई ऑपरेशनों के बावजूद वे जीवनभर दर्द और शारीरिक सीमाओं से जूझती रहीं।

दुर्घटना के बाद, फ्रिदा ने बिस्तर पर रहते हुए पेंटिंग करना शुरू किया। उनकी मां ने उनके बिस्तर के ऊपर एक विशेष मिरर लगाया, ताकि वे अपनी ही तस्वीर बना सकें। इस आत्मनिरीक्षण ने उनकी पेंटिंग्स को व्यक्तिगत और गहराई से भावनात्मक बना दिया।

1929 में, फ्रिदा ने प्रसिद्ध मैक्सिकन भित्ति चित्रकार डिएगो रिवेरा से शादी की। उनके संबंध में अनेक उतार-चढ़ाव आए, लेकिन दोनों कलाकारों ने एक-दूसरे के काम को बहुत प्रभावित किया। फ्रिदा और डिएगो का रिश्ता बहुत ही जटिल और उथल-पुथल भरा था, जिसमें कई बार धोखेबाजी और अलगाव की स्थितियां आईं।

फ्रिदा काहलो की कला शैली सच्चाई और कल्पना का मिश्रण है। उनकी पेंटिंग्स में आत्मकथात्मक तत्व प्रमुख हैं और वे अपने व्यक्तिगत अनुभवों, शारीरिक दर्द, भावनात्मक संघर्ष और राजनीतिक विचारों को व्यक्त करती हैं।

उनकी प्रमुख रचनाओं में शामिल हैं:
– “द टू फ्रिदास” (1939): यह चित्र दो फ्रिदाओं का चित्रण है, जो उनके द्वंद्वात्मक व्यक्तित्व को दर्शाता है।
– “सेल्फ-पोर्ट्रेट विद थॉर्न नेकलेस एंड हमिंगबर्ड” (1940): इसमें उन्होंने अपने आत्मनिरीक्षण और पीड़ा को दर्शाया है।
– “द ब्रोकन कॉलम” (1944): यह चित्र उनके शारीरिक दर्द और टूटे हुए रीढ़ की हड्डी का प्रतीक है।

फ्रिदा काहलो न केवल एक महान चित्रकार थीं, बल्कि वे एक सक्रिय राजनीतिक कार्यकर्ता भी थीं। उन्होंने मेक्सिकन संस्कृति और पहचान को अपनी पेंटिंग्स में प्रमुखता से दर्शाया। वे कम्युनिस्ट पार्टी की सदस्य भी थीं और उन्होंने समाजवादी सिद्धांतों का समर्थन किया।

फ्रिदा का जीवन उनके स्वास्थ्य समस्याओं के कारण अत्यंत कठिन था। उन्होंने अनेक शारीरिक कष्ट और ऑपरेशनों का सामना किया। उनके जीवन के अंतिम वर्षों में उनका स्वास्थ्य और भी खराब हो गया था। 13 जुलाई 1954 को, 47 वर्ष की आयु में फ्रिदा का निधन हो गया। उनकी मृत्यु का कारण आधिकारिक रूप से फुफ्फुसीय एम्बोलिज्म (फेफड़ों में रक्त का थक्का) बताया गया, लेकिन कुछ लोग इसे आत्महत्या मानते हैं।

फ्रिदा काहलो की पेंटिंग्स ने कला की दुनिया में गहरा प्रभाव छोड़ा है। उनकी रचनाएँ नारीवाद, मानव अधिकार और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के प्रतीक के रूप में देखी जाती हैं। आज, उनकी कलाकृतियाँ दुनिया भर के प्रमुख संग्रहालयों में प्रदर्शित की जाती हैं और वे लाखों लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हुई हैं।

फ्रिदा काहलो का जीवन संघर्ष, साहस और अद्वितीय प्रतिभा की कहानी है। उनकी पेंटिंग्स में उन्होंने अपने जीवन के हर पहलू को व्यक्त किया, जिससे वे कला प्रेमियों के दिलों में हमेशा के लिए बस गईं। उनकी विरासत उनकी कला के माध्यम से जीवित है और वे एक सशक्त और प्रेरणादायक कलाकार के रूप में याद की जाती रहेंगी।

Load More Related Articles
Load More By Niti Aggarwal
Load More In Bio-Graphy

Leave a Reply

Check Also

“एल्विस प्रेस्ली: एक जीवन कहानी” (Elvis Presley: Ek Jeevan Kahani)

एलविस आरोन प्रेस्ली का जन्म 8 जनवरी 1935 को मिसिसिपी के टूपेलो में हुआ था। उनके माता-पिता …