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Satkatha Ank Collection of Pauranik kathaye/Stories.

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1. Satkatha Ank Index

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Satkatha Ank Index
 

2. सत्कथाओं के मूल स्रोत और संतों के परम ध्येय
3. मूर्तिमान्‌ सत्‌
4. सत्कथा की महिमा
5. जीवन का वास्तविक वरदान
6. सत्कथाओं की लोकोत्तर महत्ता एवं उपयोगिता
7. देवताओंका अभिमान और परमेश्वर
8. यम के द्वार पर
9. आपद्धर्म
10. गो-सेवा से ब्रह्मज्ञान
11. अग्रियों द्वारा उपदेश
12. गाड़ी वाले का ज्ञान
13. एक अक्षर से तीन उपदेश
14. कुमारी केशिनी का त्याग और प्रह्लाद का न्याय
15. सत्कथा का महत्त्व
16. धीरता की पराकाष्ठा [मयूरध्वज का बलिदान] 17. मेरे राज्य में न चोर हैं न कृपण हैं, न शराबी हैं न व्यभिचारी हैं
18. वह तुम ही हो
19. सर्वश्रेष्ठ ब्रह्मनिष्ठ
20. सर्वोत्तम धन
21. ब्रह्म क्या है?
22. पश्चात्तापका परिणाम ( श्रीरामलालजी )
23. उसने सच कहा
24. सत्य-पालन
25. उपासना का फल
26. योग्यताकी परख
27. सम-वितरण
28. महान्‌ कौन है?
29. भक्तका स्वभाव ( श्रीसुदर्शनसिंहजी )
30. निष्कामकी कामना-इक्कीस पीढ़ियाँ तर गर्यी
31. शररिम अनासक्त भगवद्धक्त को कहीं भय नहीं
32. समस्त लौकिक-पारलौकिक सुखोंकी प्राप्तिका साधन भगवद्धक्ति
33. आर्त जगत्‌के आश्रय
34. ऐसो को उदार जग माहीं
35. श्रीराधाजीके हृदयमें चरणकमल
36. पेट-दर्द की विचित्र औषध
37. आर्त पुकार दयामय अवश्य सुनते हैं
38. धन्य कौन
39. दुर्योधनके मेवा त्यागे
40. भगवान्‌ या उनका बल?
41. श्रीकृष्ण का निजस्वरूप-दर्शन
42. हनुमानूजीके अत्यल्प गर्वका मूलसे संहार
43. दीर्घायुष्य एवं मोक्ष के हेतुभूत भगवान्‌ शड्ढडूर की आराधना
44. एकमात्र कर्तव्य क्या है?
45. भगवान्‌ सरल भाव चाहते हैं
46. भगवान्‌की प्राप्तिका उपाय
47. महापुरुषोंक अपमानसे पतन
48. गुरु सेवा से विद्याप्राप्ति
49. गुरु सेवा और उसका फल
50. बड़ोंके सम्मानका शुभ फल
51. लक्ष्मी कहाँ रहती हैं?
52. धर्मो रक्षति रक्षित:
53. भगवान्‌ कहाँ-कहाँ रहते हैं?
54. धर्मनिष्ठ सबसे अजेय है
55. धर्मरक्षामें प्राप्त विपत्ति भी मड्भलकारिणी होती है
56. धन्य कौन?
57. सदाचारसे कल्याण
58. हमें मृत्युका भय नहीं है
59. नास्तिकताका कुठार
60. सदाचारका बल
61. गर्भस्थ शिशुपर माताके जीवन का गम्भीर प्रभाव पड़ता है
62. दूषित अन्नका प्रभाव
63. आर्य-कन्याका आदर्श
64. आर्य-नारीका आदर्श
65. मैं स्वेच्छासे परपुरुषका स्पर्श नहीं कर सकती
66. कैंसे आचरणसे नारी पतिको बशमें कर लेती है?
67. कीड़ेसे महर्षि मैत्रेय
68. नल-दमयन्तीके पूर्वजन्मका वृत्तान्त
69. अनन्यता-मैं किसी भी दूसरे गुरुमाता-पिताकों नहीं जानता
70. तुम्हारे ही लिये राम वन जा रहे हैं
71. मेंरे समान पापों का घर कौन? तुम्हारा नाम याद करते ही पाप नष्ट हो जायेंगे
72. मैं तुम्हारा चिऋणी-केवल आपके अनुग्रहका बल
73. सप्तर्षियोंका त्याग
74. तत्त्वज्ञानके श्रवणका अधिकारी
75. परात्पर तत््वकी शिशु-लीला
76. सब चमार हैं
77. यह सच या वह सच ?
78. आपका राज्य कहाँतक है ?
79. संसारके सम्बन्ध भ्रममात्र हैं
80. संतानके मोहसे विपत्ति
81. शुकदेवजीकी समता
82. शुकदेवजीका वैराग्य
83. तपोबल
84. वरणीय दु:ख है, सुख नहीं
85. स्त्रीजित होना अनर्थकारी है
86. कामासक्तिसे विनाश
87. कामवश बिना बिचरे प्रतिज्ञा करनेसे विपत्ति
88. परस्त्रीमें आसक्ति मृत्युका कारण होती है
89. क्रोध मत करो, कोई किसीको मारता नहीं
90. अभिमानका पाप (ब्रह्माजीका दर्पभड्ग ] 91. मिथ्याभिमान
92. सिद्धिका गर्व
93. राम-नामकी अलौकिक महिमा [वेश्याका उद्धार] 94. विश्वासकी विजय [ श्वेत मुनिपर शंकरकी कृपा] 95. शबरीकी दृढ़ निष्ठा
96. आपदि कि करणीयम्‌, स्मरणीयं चरणयुगलमम्बाया:
97. सुदर्शनपर जगदम्बाकी कृपा
98. सच्ची निष्ठा [गणेशजीकी कृपा] 99. लोभका दुष्परिणाम
100. आदर्श निर्लभी
101. सत्य-पालनकी दृढ़ता
102. तनिक-सा भी असत्य पुण्यको नष्ट कर देता है
103. ईमानदार व्यापारी
104. वह सत्य सत्य नहीं, जो निर्दोषकी हत्यामें कारण हो
105. यज्ञमें पशुबलिका समर्थन असत्यका समर्थन है
106. आखेट तथा असावधानीका दुष्परिणाम
107. यक्षमें या देवताके लिये की गयी पशुबलि भी पुण्योंको नष्ट कर देती है
108. दूसरोंका अमड्भल चाहनेमें अपना अमड्ल पहले होता है
109. परोपकार महान धर्म
110. अर्जुनकी शरणागतवत्सलता और श्रीकृष्णके साथ युद्ध
111. जीर्णेद्धारका पुण्य
112. श्रैतका उद्धार
113. विचित्र परीक्षा
114. विलक्षण दानवीरता
115. शोकके अवसरपर हर्ष क्यों?
116. उल्लासके समय खिन्न क्यों?
117. उत्तम दानकी महत्ता त्यागमें है, न कि संख्यामें
118. भगवती सीताकी शक्ति तथा पराक्रम
119. थीौर भाताकां आदर्श
120. पतिको रणमें भेजते सपयका विनोद कक
121. शञ्जी शंमा ट्रेषपर विजय सती है
122. -घोर क्लेशमें भौ सत्पथपर अडिग शहनेजाला भहापुरुष है
123. सेवा-निहाका चमत्कार
124. सत्कारसे शत्रु भी मित्र हो जाते हैं
125. अतिथि-सत्कारका प्रभाभ
126. शैरड-जिचित्र आतिथ्य
127. सम्मान तथा भधुर भाषणसे राक्षस भी वशीभूत
128. चाटुकारिता अनर्थकारिणी है
129. मैत्री -निर्वाह [कर्णकी महत्ता] 130. अलौकिक भ्रातृप्रेम
131. अनोखा प्रभु-विश्वास और प्रभु-प्रीति
132. थिश्वास हो तो भगवान्‌ सदा समीप हैं
133. सबसे दुबली आशा
134. पार्वतीकी परीक्षा कि
135. चोरीका दण्ड
136. मड्डिका चैराग्य
137. ु:खदायी परिह्ासका कटु परिणाम [खगमका क्रोध] 138. परिष्ठाससे ऋषिके तिरस्कारका कुफल [ परीक्षित्‌॒को शाप] 139. आश्रितका त्याग अभीष्ट नहीं [ धर्मराजकी धार्मिकता] 140. मृत्युका कारण प्राणीका अपना ही कर्म है
141. दुरभिमानका परिणाम [बर्बरीकका वध] 142. जुआरीसे राजा [स्वर्गमें अद्भुत दाता] 143. टृढ़ निष्ठा
144. किसी भी बहानेसे धर्मका त्याग नहीं कर सकता
145. नियम-निष्ठाका प्रभाव
146. आसक्तिसे बन्धन
147. डश्रद्धा -धर्य और उद्योगसे अशक्य भी शक्य होता हैं
148. लक्ष्यके प्रति एकाग्रता
149. सच्ची लगन क्या नहीं कर सकती
150. सच्ची निष्टाका सुपरिणाम
151. सबसे बड़ा आश्चर्य
152. भगवत्कथाब्रवणका माहात्म्य
153. भगवद्वीताका अद्भुत माहात्म्म
154. गायका मूल्य
155. गो-सेवाका शुभ परिणाम
156. वनयात्राका गो-दान
157. सत्सड्रकी महिमा
158. सच्चे संतका शाप भी मड़लकारी होता है
159. क्षणभरका कुसज्ज भी पतनका कारण होता है
160. क्षणभरका सत्सड्र कलुषित जीवनको भी परमोज्वल कर देता है
161. किसीको धर्ममें लगाना ही उसपर सच्ची कृपा करा है
162. वैष्णव-सड़॒का श्रेष्ठ फल
163. चित्रध्वजसे चित्ररला
164. सु-भद्रा (पं श्रीसूरजचन्दजी सत्यप्रेमी ‘डाॉगीजी)
165. धैर्यसे पुन: सुखकी प्राप्ति
166. आत्मप्रशंसासे पुण्य नष्ट हो जाते हैं
167. जरा-मृत्यु नहीं टल सकती
168. विद्या अध्ययन करनेसे ही आती है
169. जहाँ मन, वहीं हम
170. बुरे काममें देर करनी चाहिये
171. प्रतिज्ञा [ त्रेतामें राम अवतारी, द्वापरमें कृष्णमुरारी ] 172. गृश्र और उलूकको न्याय
173. पुण्यकार्य कलपर मत टालो
174. तर्पण और श्राद्ध
175. आत्महत्या कैसी मूर्खा
176. रोम-रोमसे ‘जय कृष्ण’ की ध्वनि
177. कृतप्न पुरुषका मांस राक्षस भी नहीं खाते
178. जटिल प्रक्नोत्तर
179. पूर्ण समर्पण [ तेरा, सो सब मेरा] (श्रीहरकिशनजी झबेरी)
180. जरा-सा भी गुण देखो, दोष नहीं
181. एक मुट्ठी अनाजपर भी अधिकार नहीं
182. परोपकारमें आनन्द
183. आत्मज्ञानसे ही शान्ति
184. भक्त विमलतीर्थ
185. जगतू कल्पना है संकल्पमात्र है
186. सर्वत्याग
187. साधुताकी कसौटी
188. सत्संकल्प
189. विचित्र न्याय
190. विचित्र सहानुभूति
191. सदुपदेश
192. सहनशीलता
193. धनका सदुपयोग
194. ब्राह्मण
195. अग्रिपरीक्षा
196. सच्ची माँग
197. आत्मदान
198. जाको राख साइयाँ, मारिसकै नाकोय
199. गुणग्राहकता
200. धनी कौन ?
201. युक्ताहारविहारस्य योगो भवति दुःखहा’
202. अपनी खोज
203. वैराग्यका क्षण
204. संन्यासका मूल्य
205. परीक्षाका माध्यम
206. सहज अधिकार
207. निर्वाण-पथ
208. कोई घर भी मौतसे नहीं बचा
209. सच्चा साधु
210. समझौता
211. सच्चे सुखका बोध
212. गाली कहाँ जायगी?
213. आकर्षण
214. आत्मकल्याण
215. दानकी मर्यादा
216. आत्मशान्ति
217. बासी अन्न
218. चमत्कार नहीं, सदाचार चाहिये
219. धर्मविजय
220. यह धन मेरा नहीं, तुम्हारा है
221. अर्जुनकी उदारताका अभिमानभड़ [कर्णका चन्दन-दान] 222. अर्जुनका भक्ति-अभिमानभड़ [दिगम्बरकी भक्ति-निष्ठी] 223. श्रीनारदका अभिमान-भड़
224. नारदका कामविजयका अभिमान-भड्ढ
225. इच्धका गर्व-भड़?
226. गरुड, सुदर्शनचक्र और रानियोंका गर्ब-भड़
227. श्रीमारुति-गर्व-भड़ रेड
228. भीमसेनका गर्व-भड्
229. सर्वश्रेष्ठ शासक
230. अद्धुत पितृ-भक्ति
231. सत्यकी ज्योति
232. पाँच स्कन्धोंका संघात (श्रीप्रतापनारायणजी टंडन)
233. विद्याका अहंकार
234. सच्ची दृष्टि
235. मुक्तिका मूल्य
236. अक्रोधेन जयेत्‌ क्रोधम्‌
237. कथा-प्रेम
238. नशा उतर गया
239. प्रतिकूल परिस्थितिसे बचे रहो
240. अपने बलपर अपना निर्माण (कविरत्र श्रीअमरचन्द्रजी मुनि)
241. अभयका देवता
242. नारी नरसे आगे
243. भोगमेंसे जन्मा वैराग्य
244. सत्सज्का लाभ
245. महत्त्वपूर्ण दान
246. प्रलोभनोंपर विजय प्रात करो
247. हमारे कुलमें युवा नहीं मरते
248. मैं दलदलमें नहीं गिरुगा
249. भगवान्‌ प्रसन्न होते हैं [गिलहरीपर राम-कृपा
250. मसंस्तक खिक्रय
251. रूर पाए भक्त आचार्य शंशक
252. कपलपञॉपर गड्भापार (आचार्य श्रीबलरामजी शास्त्री, एम्‌ू ए, साहित्यरत)
253. कृत्तेका भय भी अनित्य है
254. चैदिक धर्मका उद्धार
255. भगषान्‌ नारायणका भजन ही सार है भगवानसे विवाह
256. नम्नताके आँसू
257. स्त्रीके सहवाससे भक्तका पतन
258. ब्राह्मणके कंधेपर
259. छोटी कोठरीमें भगवहर्शन
260. भगवान्‌ लूट लिये गये
261. भगवान्‌की मूर्ति बोल उठी
262. गुरुप्रासि
263. भगवानूका पेट कब भरता है?
264. अपना काम स्वयं पूरा करें
265. सबके कल्याणका पवित्र भाव
266. भक्त आचार्यकी आदर्श विनग्रता
267. विद्यादान न देनेसे ब्रह्मराक्षस हुआ प्रेमपात्र कौन?
268. सत्याग्रह
269. धर्मकी सूक्ष्म गति
270. सच्ची प्रशंसा
271. जीरादेई
272. दुष्टोंको भी सौजन्यसे जीतिये
273. दानका फल
274. केवल इतनेसे ही पतन
275. आत्मयज्ञ
276. सच्ची क्षमा
277. धन्य भामती (श्रीयुत एस्‌ू एम् वोरा)
278. किसीकी हँसी उड़ाना उसे शत्रु बनाना है [दुर्योधनका अपमान] 279. परिहासका दुष्परिणाम [यादव-कुलको भीषण शाप] 280. भगवजन्नाम का जप करनेवाला सदा निर्भय है
281. पलक
282. भगवन्नाम समस्त पापोंको भस्म कर देता है
283. कुनत्तीका त्याग्
284. अद्धभुत क्षमा [द्रौपदीका मातृभाव] कसा
285. लगन हो तो सफलता निश्चित है
286. स्वामिभक्ति धन्य है
287. दूसरोंका पाप छिपाने और अपना पाप प्रकट करनेसे धर्ममें दृढ़ता होती है
288. गोस्वामीजीकी कविता हि
289. सूरदास और कन्या (“राधा”)
290. मेरी आँखें पुनः फूट जाये
291. समर्पणकी मर्यादा
292. भागवत-जीवन
293. हाथोंमें थाम लिया
294. व्यासजीकी प्रसादनिष्ठा ( श्रीवासुदेवजी गोस्वामी )
295. अनन्य आशा (भक्त श्रीरामशरणदासजी )
296. ब्रज-रजपर निछावर
297. प्रसादका अपमान
298. लीलामयकी लीला
299. मरते पुत्रको बोध
300. चोरका हृदय पलटा
301. सम्पत्तिके सब साथी, विपत्तिका कोई नहीं
302. श्रीधर स्वामीका संन्यास
303. विकट तपस्वी
304. निर्मलाकी निर्मल मति
305. मेरा उगना कहाँ गया?
306. गृह-कलह रोकनेके लिये आत्मोत्सर्ग
307. स्वामिभक्ति
308. आतिथ्य-निर्वाह
309. परमात्मा सर्वव्यापक है
310. गरीबके दानकी महिमा
311. अंत न होइ कोई आपना
312. शेरको अहिंसक भक्त बनाया (गो्नग्बै)
313. संसारसे सावधान
314. जो तोकौं काँटा बुवै, ताहि बोइ तू फूल
315. अम्बादासका कल्याण (श्रीयुत मा परांडे)
316. अहंकार-नाश ( श्रीयुत एम् एन् धारकर) किन्नर
317. कुत्तेको भी न्याय [रामराज्यकी महिमा] 318. सिंहिनीका दूध (गोनण्बै)
319. प्रेम-दयाके बिना ब्रत-उपवास व्यर्थ
320. परधर्मसहिष्णुताकी विजय
321. शिवाका आदर्श दान
322. पहले कर्तव्य पीछे पुत्रका विवाह
323. समय-सूचकका सम्मान
324. उदारताका त्रिवेणी-सड़म [शिवाजीका ब्राह्मणप्रेम,तानाजीकी स्वामिनिष्ठा ओर ब्राह्मणकी प्रत्युपकारबुद्धि] (गो्नबै)
325. धन है धूलि समान (श्रीताराचन्द्रजी अडालजा)
326. पितरोंका आगमन
327. नाथकी भूतदयाकी फलश्रुति (गोनबै)
328. क्षमाने दुर्जजको सज्जन बनाया
329. तुकारामजीकी शान्ति
330. पतिसेवासे पति वशमें (गोनबै)
331. तुकारामका गो-प्रेम
332. भगवान्‌ थाल साफ कर गये
333. कच्चा बर्तन
334. योगक्षेमं॑ वहाम्यहम्‌
335. सबमें भगवान्‌
336. नामदेवका गौके लिये प्राणदान
337. पारस-कंकड़ एक समान
338. धूलपर धूल डालनेसे क्या लाभ
339. जब सूली पानी-पानी हो गयी
340. नित्य-नियमका कठोर आचरण
341. प्रेम-तपस्विनी ब्रह्मविद्या|
342. हंसोंके द्वारा भीष्मको संदेश कल
343. संत बनना सहज नहीं (गो्न्बै)
344. सभीका ईश्वर एक था
345. अकालपीड़ितोंकी आदर्श सेवा
346. अग्नि भी वशमें
347. साधुसे छेड़छाड़ न करे
348. अपकारका प्रत्यक्ष दण्ड
349. उजडुपनका इनाम
350. अपनेको पहचानना सहज नहीं
351. दानाध्यक्षकी निष्पक्षता
352. मूर्ख छन्दानुरोधेन
353. डाकूसे संत (श्रीमाणिकलाल शंकरलाल राणा)
354. अपनी कमाईका पकवान ताजा
355. बाजीराव प्रथमकी उदारता
356. मधुर विनोद (‘राधा’)
357. रहस्य-उद्घाटन [रहीमकी रक्षा] (कुमारी श्रीराधा)
358. मर्यादाका औचित्य
359. हम-सरीखोंको कौन जिमाता है
360. भक्तापराध
361. ध्यानमें मधुर लीलादर्शन
362. ध्यानकी लीला
363. यह उदारता
364. प्रकाशानन्दजीको प्रबोध
365. भगवान्‌की प्रसन्नता
366. संतका सम्पर्क
367. मैं श्रीकृष्णसे मिलने जा रहा हूँ
368. नामनिन्दासे नाक कट गयी
369. सर्वत्र गुण-दृष्टि
370. चोरोंका सत्कार (बाबू महिद्धसिंहजी)
371. डाकूसे महात्मा (वैद्य श्रीभगवद्यासजी साधु आयुर्वेदाचार्य )
372. पापका बाप कौन ?
373. विचित्र दानी
374. सहनशीलता
375. भट्टजीकी जाँघोंपर भगवान्‌ (राधा)
376. काशीमें मरनेसे मुक्ति
377. ईमानदारी सबसे बड़ी सिद्धि
378. धर्मके लिये प्राणदान
379. सज्जनता
380. सच्चे भाई-बहन
381. सच्ची शिक्षा
382. संतके सामने दम्भ नहीं चल सकता
383. संतकी सर्वसमर्थता
384. कुलीनता
385. ब्रह्मज्ञान कब होता है?
386. मैं मूर्खता क्‍यों करूँ
387. हकसे अधिक लेना तो पाप है
388. सेवाभाव
389. जीव-दया
390. नाग महाशयकी साधुता
391. किसीके फष्टकी बातपर अविश्वास उचित नहीं
392. आत्मीयता इसका नाम है
393. शिष्यकी परीक्षा
394. केवल विश्वास चाहिये
395. साधुताका परम आदर्श
396. महापुरुषोंकी उदारता
397. अतिथि-सत्कार
398. स्वावलम्बन
399. कोई वस्तु व्यर्थ मत फेंको
400. एक बात
401. सच्ची दानशीलता
402. आदर्श नम्नता
403. सबमें आत्मभा
404. मातृभक्ति
405. मेरे कारण कोई झूठ क्‍यों बोले
406. सत्यके लिये त्याग
407. माता-पिताके चरणोंमें [ प्रथम पूज्य गणेशजी] 408. जाको राखै साइयाँ, मार सके ना कोय
409. सर गुरुदासकी कट्टरता
410. महेशकी महानता
411. सदव्यवहार
412. पुजारीको आश्वर्थय
413. भगवानका
414. राक्षसीका उद्धार [ पुण्य-दानकी महिमा] 415. -परोपकारका आदर्श [सुलक्षणापर शिव-कृपा] 416. न्याय और धर्म [चमारसे भूमिदान] 417. शास्त्रज्ञानने रक्षा की
418. विक्रमकी जीव-दया
419. सर्वस्वदान [हर्षवर्धनकी उदारता] 420. बैलोंकी चोट संतपर
421. संत-दर्शनका प्रभाव
422. रामूकी तीर्थवात्रा
423. रंगनादकी पितृभक्ति
424. कृतज्ञता
425. गुरुनिष्ठा
426. स्वामी श्रीदयानन्दजी सरस्वतीके जीवनकी कुछ कथाएँ (श्रीबाबूरामजी गुप्त)
427. मौन व्याख्यान
428. पैदल यात्रा
429. भाव सच्चा होना चाहिये
430. जीवनचरित कैसे लिखना चाहिये
431. संकटमें भी चित्तशान्ति
432. विद्या-व्यासज्ञकी रुचि
433. कागज-पत्र देखना था, रमणी नहीं
434. विपत्तिमें भी विनोद
435. स्थितप्रता
436. दुः:खेष्वनुद्ठिग्रमना:
437. सत्याचरण
438. जिह्ाको वशमें रखना चाहिये
439. अद्धुत शान्तिप्रियता
440. हस्त-लेखका मूल्य
441. काले झंडेका भी स्वागत
442. कर्मण्येवाधिकारस्ते [महात्मा गाँधी और लेनिन (पं श्रीबनारसीदासजी चतुर्वेदी)
443. पूरे सालभर आम नहीं खाये
444. मारे शरमके चुप
445. अद्भुत क्षमा
446. सहनशीलता
447. रामचरितमानसके दोष
448. मैं खून नहीं पी सकता
449. चिन्ताका कारण
450. विलक्षण संकोच
451. भगवतू-विस्मृतिका पश्चात्ताप
452. गोरक्षाके लिये स्वराज्य भी त्याज्य
453. अन्यायका परिमार्ज
454. डएण-नल-राम-युधिष्ठिर पूजनीय हैं
455. संतसेवा
456. आदर्श सहनशीलत
457. डडए-विलक्षण क्षमा
458. घट-घटमें भगवान्‌
459. मैं नहीं मारता तो मुझे कोई क्‍यों मारेगा (कु राधा)
460. प्रसादका
461. भगवन्नाममय जीवन
462. परोपकारके लिये अपना मांस-दान
463. गुप्ताज़ फॉली
464. तुलसीका चमत्कार
465. भगवानके भरोसे उद्योग कर्तव्य है
466. अहिंसाका चमत्कार
467. हदय-परिवर्तन [ अंगुलिमालका परिवर्तन] 468. इन्द्रिय-संयम [नर्तकीका अनुताप] 469. निष्पक्ष न्याय [रानीको दण्ड] 470. अहिंसाकी हिंसाप विजय
471. वैभवको धिक्कार है [ भरत और बाहुबलि] 472. शूलीसे स्वर्णसिंहासानरर्र्
473. अडिग निश्चय-सफलताकी कुंजी
474. सर्वत्र परम पिता ( श्रीलोकनाथप्रसादजी ढाँढनिया)
475. संन्यासी और ब्राह्मणका धनसे क्या सम्बन्ध? (भक्त श्रीरामशरणदासजी )
476. स्वप्रके पापका भीषण प्रायश्चित्त
477. भगवत्सेवक अजेय है [महावीर हनूमानूजी ] 478. दीनोंके प्रति आत्मीयता (प्रेषक-श्रीत्रजगोपालदासजी अग्रवाल)
479. संस्कृत-हिंदीको छोड़कर अन्य भाषाका कोई भी शब्द न बोलनेका नियम (भक्त श्रीरामशरणदासजी )
480. गो-ब्राह्मण-भक्ति [ स्वर्गीय धार्मिक नरेश परम भक्त महाराज प्रतापसिंहजी काश्मीरके जीवनकी घटनाएँ] (भक्त श्रीरमशरणदासजी)
481. आजादकी अद्भुत जितेन्द्रिया
482. सिगरेट आपकी तो उसका धुआँ किसका? (स्वामीजी श्रीप्रेमपुरीजी )
483. कर सौं तलवार गहौ जगदंबा
484. जीव ब्रह्म कैसे होता है (श्रीयोगेश्वरजी त्रिपाठी बी ए)
485. भगवत्प्रेम
486. पड़ोसी कौन?
487. दर्शनकी पिपासा
488. परमात्मामें विश्वास
489. विश्वासकी शक्ति
490. दीनताका वरण
491. दरिद्रनारायणकी सेवा
492. अमर जीवनकी खोज
493. प्रभुविश्वासी राजकन्या
494. असहायके आश्रय
495. क्षणिक जीवन
496. सत्यं शिवं सुन्दरम्‌
497. मुझे एक ही बार मना है
498. गर्व किसपर ?
499. विषपान
500. सत्यभाषणका प्रताप
501. पिताके सत्यको रक्षा
502. आतिथ्यका सुफल
503. धर्मप्रचारके लिये जीवनदान
504. मृतकके प्रति सहानुभूति
505. सच्चा बलिदान
506. संतकी एकान्तप्रियता
507. प्रार्थनाकी शक्ति
508. संतकी निर्भयता
509. सौन्दर्यकी पवित्रता
510. संतकी सेवा-वृत्ति
511. संत प्रचारसे दूर भागते हैं
512. गरजनेके बाद बरसना भी चाहिये
513. कलाकी पूजा सर्वत्र होती है
514. मौनकी शक्ति
515. दैन्यकी चरम सीमा
516. निष्कपट आश्वासन
517. समयका मूल्य
518. भद्रमहिलाका स्वच्छन्द घूमना उचित नहीं
519. कष्टमें भी क्रोध नहीं
520. न मे भक्त: प्रणश्यति
521. व्यभिचारीका जीवन बदल गया
522. पवित्र अन्न [गुरु नानकदेवका अनुभव] 523. गुरुभक्ति
524. सत्यनिष्ठा [गुरु रामसिंह ] 525. पंजाब-केसरीकी उदारता
526. नामदेवकी समता-परीक्षा
527. एकनाथजीकी अक्रोध-परीक्षा -तुकारामका विश्वास
528. सेवाभाव[ समर्थका पनबट्टा ] 529. देशके लिये बलिदान
530. उदारता
531. सार्वजनिक सेवाके लिये त्याग
532. सत्यको शक्तिका अद्भुत चमत्कार ( श्रीरघुनाथप्रसादजी पाठक) कि
533. सत्यवादितासे उन्नति
534. सच्ची मित्रता
535. दो मित्रोंका आदर्श प्रेम न
536. सद्धावना
537. स्वर्ग ही हाथसे निकल जायगा
538. प्रार्थनाका प्रभाव
539. जीवन-दब्रत
540. आप बड़े डाकू हैं
541. सिकन्दरकी मातृ-भक्ति न
542. कलाकारकी शिष्टता
543. सुलेमानका न्याय
544. चोरीका त्याग
545. सभ्यता
546. देशभक्ति
547. कर्तव्य-पालन
548. आनन्दघनकी खीझ
549. आज्ञा-पालन
550. भ्रातृप्रेम
551. उत्तम कुलाभिमान
552. अपनी प्रशंसासे अरुचि
553. संयम मनुष्यको महान्‌ बनाता है
554. मानवता
555. सद्धाव
556. अद्भधुत साहस
557. भारको सम्मान दो
558. न्यूटनकी निरभिमानता
559. गरीबोंकी उपेक्षा पूरे समाजके लिये घातक है
560. लोभका बुरा परिणाम [विचित्र बाँसुरीवाल
561. उसकी मानवता धन्य हो गयी
562. प्रत्येक व्यक्ति एक-दूसरेका सेवक हे
563. परिश्रम मौरवकी वस्तु है
564. क्षमाशीलता
565. श्रमका फल
566. अन्त भला तो सब भला
567. उद्यमका जादू
568. न्यायका सम्मान (गोनबै)
569. स्वावलम्बनका फल
570. निर्माता और विजेता
571. स्वावलम्बी विद्यार्थी
572. आदर्श दण्ड
573. अन्यायका पैसा
574. ई श्वरके विधानपर विश्वास
575. दीपक जलाकर देखो तो [ युद्धके समय एक सैनिकका अनुभव] 576. दया
577. अद्धुत त्याग
578. दयालु बादशाह
579. परोपकार और सचाईका फल हे
580. जीवन-दर्शन
581. मृत्युकी खोज
582. लड़का गाता रहा
583. महल नहीं, धर्मशाला
584. दानका फल
585. एकान्त कहीं नहीं
586. उदार स्वामी
587. विषयोंमें दुर्गन्‍्ध
588. रुपया मिला और भजन छूटा
589. धनका परिणाम-हिंसा
590. डाइन खा गयी
591. यह वत्सलता
592. वह अपने प्राणपपर खेल गयी
593. मनुष्यका गर्व व्यर्थ है
594. अच्छी फसल
595. महान्‌ वैज्ञानिककी विनम्रता
596. प्रेमका झरना
597. बुद्धिमानीका परिचय
598. प्रार्थानाका फल
599. सच्चा साहसी
600. मृत्युकी घाटी
601. ईश्वर रक्षक है
602. दयालु स्वामीके दिये दुःखका भी स्वागत
603. ईश्वरके साथ
604. भगवान्‌ सब अच्छा ही करते हैं
605. सब अवस्थामें भगवत्कृपाका अनुभ
606. दो मार्ग
607. अहंकार तथा दिखावटसे पुण्य नष्ट
608. सेवककी इच्छा क्‍या?
609. सच्चा साधु
610. सच्चे भक्तका अनुभव
611. फकीरी क्‍यों ?
612. अत्यधिक कल्याणकर
613. जीवन-क्षण
614. चेतावनी
615. शिक्षा
616. अस्थिर दृष्टि
617. निष्कपट स्वीकृति
618. सुरक्षार्थ
619. विवशता
620. संत-स्वभाव
621. सहनशीलता
622. सुहद्‌
623. मनुष्यका मांस
624. संतका व्यवहार
625. क्रोधहीनताका प्रमाण
626. साधुता
627. सहिष्णुता
628. संतका सद्व्यवहार
629. क्रोध असुर है
630. क्या यह तुझे शोभा देगा ?
631. दायें हाथका दिया बायाँ हाथ भी न जान पाये
632. अच्छा पैसा ही अच्छे काममें लगता है
633. धनके दुरुपयोगका परिणाम
634. दरिद्र कौन है ?
635. स्वावलम्बीका बल
636. नित्य अभिन्न [उमा-महे श्वर ] 637. मित्र चोर निकला
638. आप सुलतान कैसे हुए?
639. सद्धावना-रक्षा
640. तल्लीनता
641. माताकी सेवा
642. करुणाका आदर्श
643. अतिथिकी योग्यता नहीं देखनी चाहिये
644. उचित न्याय
645. उपासनामें तन्‍न्मयता चाहिये
646. उत्तमताका कारण
647. आजलसे मैं ही तुम्हारा पुत्र और तुम मेरी माँ
648. ऐसा कोई नहीं जिससे
649. कोई अपराध न बना हो
650. तू भिखारी मुझे क्‍या देगा
651. न्यायकी मर्यादा
652. शरणागत-रक्षा
653. सच्ची न्यायनिष्ठा
654. अपरिग्रह
655. दानी राजा
656. स्वागतका तरीका
657. कर्तव्यके प्रति सावधानी
658. कर्तव्यनिष्ठा
659. नीति
660. अपूर्व स्वामिभक्ति धि
661. अतिथिके लिये उत्सर्ग
662. शौर्यका सम्मान
663. मैं आपका पुत्र हूँ
664. चन्द्राकी मरणचन्द्रिका
665. लाजवंतीका सतीत्व-लालित्य
666. अभिमानकी चिकित्सा
667. मन्दाकिनीका मोहभड़ ] 668. सच्ची पतित्रता [जयदेव-पत्नी] 669. अच्छे पुरुष साधारण व्यक्तिकी बातोंका भी ध्यान करके कर्तव्यपालन करते हैं
670. नावेरकी सीख
671. प्रेमकी शिक्षा (प्रेषक-सेठ श्रीहरकिशनजी )
672. निन्दाकी प्रशंसा
673. धर्मों रक्षति रक्षित:
674. उचित गौरव
675. है और नहीं
676. वस्तुका मूल्य उसके उपयोगमें है
677. अमरफल
678. आँख और कान में भेद
679. तैरना जानते हो या नहीं ?
680. बुढियाकी झोंपड़ी
681. नियम टूटने मत दो
682. नियम-पालनका लाभ
683. सफलताके लिये श्रद्धाके साथ श्रम भी चाहिये
684. धनका गर्व उचित नहीं
685. फलनेका मौका देना चाहिये
686. नित्य-दम्पति [ श्रीराधा-कृष्ण-परिणय ] 687. सच्चा अध्ययन
688. कर्मफल
689. लक्ष्मीका वास कहाँ है?
690. ऋण चुकाना ही पड़ता है
691. अपनी करनी अपने सिर
692. अद्धुत पराक्रम
693. गाँधीजीके तनपर एक लंगोटी ही क्‍यों ?
694. काल करे सो आज कर
695. ग्रीजेलने अपने पिताको फाँसीसे कैसे बचाया ?
696. उदारता और परदु:खकातरता
697. श्रमकी महत्ता
698. कर्तव्यपालनका महत्त्व
699. नेक कमाईकी बरकत
700. सच्ची नीयत
701. पारमार्थिक प्रेम बेचनेकी वस्तु नहीं
702. सहायता लेनेमें संकोच
703. ग्रामीण की ईमानदारी
704. लोभका फल
705. श्रीचैतन्यका महान त्याग
706. साधुके लिये स्त्री-दर्शन ही सबसे बड़ा पाप
707. सच्चा गीता पाठ
708. नामनिष्ठा और क्षमा
709. कैयट की नि:स्पृहता
710. पति-पत्नी दोनों निःस्पृह
711. दूसरों की तृप्ति में तृप्ति
712. सच्ची शोभा
713. जुए या सट्रेमें मनुष्य विवेकहीन हो जाता है
714. विवेकहीनता
715. मन का पाप
716. अन्नदोष
717. विजयोन्मादके क्षणोंमें
718. कृतज्ञताका मूल्य
719. संसर्गसे गुण-दोष
720. दुर्जन-सड्रका फल
721. सच्चे आदमीकी खोज
722. परिवर्तनशीलके लिये सुख-दुःख क्‍या मानना
723. टूनलालको कौन मार सकता है
724. कुत्ता श्रेष्ठ है या मनुष्य
725. संतकी विचित्र असहिष्णुता
726. गरीब चोरसे सहानुभूति
727. संत-स्वभाव ह
728. दूसरोंके दोष मत देखो
729. सबसे बड़ा दान अभयदान
730. अपने प्रति अन्याय
731. सबसे अपवित्र है क्रोध
732. निष्पाप हो वह पत्थर मारे
733. ऋण लेकर भूलना नहीं चाहिये
734. सच्चा वीर
735. सम्मान पदमें है या मनुष्यतामें
736. कुसड्जका दुष्परिणाम
737. सहनशीलता
738. क्षमा
739. पवित्र बलिदान
740. वैष्णवकी नम्रता
741. संतकी सहनशीलता
742. बोलै नहीं तो गुस्सा मरे
743. क्रोधमें मनुष्य हितैषीको भी मार डालता है
744. अक्रोध
745. ब्रह्मज्ञानका अधिकारी
746. सोनेका दान
747. किसी भी हालतमें निर्दोष नहीं
748. सभी परमात्माकी संतान हैं
749. मांस सस्ता या महँगा ?
750. अभी बहुत दिन हैं :
751. अपने अनुभवके बिना दूसरेके कष्टका ज्ञान नहीं होता
752. अन्यायका कुफल
753. आसक्तिका अन्तर
754. अशर्फैयोंसे घृणा
755. त्याग या बुद्धिमानी
756. गर्व किसपर ?
757. अनधिकारी राजा
758. सुकुमार वीर
759. किससे माँगू?
760. सच्वा त्याग और क्षमा
761. साधुवेष बनाकर धोखा देना बड़ा पाप है
762. दयासे बादशाही
763. प्राणी-सेवासे ब्रह्मानन्दकी प्राप्त
764. मेहनतकी कमाई और उचित वितरणसे प्रसन्नता
765. कहानीके द्वारा वैराग्य
766. महत्त्व किसमें ?
767. संसारका स्वरूप
768. अभीसे अभ्यास होना अच्छा
769. स्वयं पालन करनेवाला ही उपदेश देने का अधिकारी है
770. पुरुष या स्त्री?
771. मेरा भी अनुकरण करनेवाले हैं
772. ईश्वर श्रद्धासे जाना जाता है
773. वेषसे साधु साधु नहीं, गुणोंसे साधु साधु है
774. मैं किसीका कल्याण करूँ और उसे जान भी न पाऊँ
775. अनन्य निष्ठा
776. सच्चा साधु-भिखारी
777. भगवानूपर मनुष्य-जितना भी विश्वास नहीं?
778. सच्ची श्रद्धा
779. हककी रोटी
780. संतकी क्षमा
781. नीचा सिर क्‍यों?
782. आतिथ्य धर्म
783. अस्तेय
784. कामना कष्टदायिनी
785. सच्चा भाव
786. भगवान्‌की कृपापर विश्वास
787. कोड़ियोंसे भी कम कीमत
788. एक पैसेकी भी सिद्धि नहीं
789. हम मूर्ख क्‍यों बनें
790. वास्तविक उदारता
791. भगवान् ‌का भरोसा
792. विश्वासका फल
793. विचित्र बहुरूपिया
794. नींद कैसे आवे?
795. नीच गुरु
796. रूप नादमें देख लो
797. मांस, मेद, मज्जाकी सुन्दरता कसाईखानेमें बहुत है न
798. सतीत्वकी रक्षा (श्रीब्रह्मानन्दजी ‘बन्धु )
799. शास्त्रीजीपर कृपा
800. पुलिस कप्तान साहेबकी गणेशभक्ति
801. बाँधको रक्षा
802. धर्मके नामपर हिंसा
803. आर्यकन्याकी आराध्या
804. ब्राह्मणीके द्वारा जीवरक्षा
805. गोपाल पुत्ररूपमें
806. भगवानके दर्शन
807. सेवा-कुञझमें दर्शन
808. प्रभुकी वस्तु
809. देवीजीके दर्शन
810. भक्तकी रक्षा
811. अंधा हो गया
812. वात्सल्य
813. वात्सल्यवती वृद्धा
814. कुष्ठीके रूपमें भगवान्‌
815. शिव-पार्वतीकी कृपा
816. अन्त मति सो गति
817. विवाहमें भी त्याग
818. भगवजन्नामसे रोगनाश
819. रामनामसे शराबकी आदत भी छूटी
820. भगवषत्प्राप्तिके लिये कैसी व्याकुलत अपेक्षित
821. लक्ष्य और साधना
822. भगवान्‌ सदा साथ हैं
823. सरयूजीसे रास्ता
824. बिहारीजी गवाह का
825. पहले ललिताजीके दर्शन कीजिये
826. मेरे तो बहिन-बहनोई दोनों हैं
827. विश्वास करके लड़की यमुनाजीमें पार हो गयी
828. हिंसाका कुफल (श्रीलीलाधरजी पाण्डेय)
829. साधु-महात्माको कुछ देकर आना चाहिये
830. (डॉ श्रीयतीशचन्द्र राय)
831. बाबा शेर बनकर गीदड़ क्‍यों बनते हो?
832. (भक्त श्रीोरामशरणदासजो )
833. भगवती ने कन्या रूप से टटिया नाँधी
834. (श्रीहरिश्वन्द्रदासजी नी ए)
835. अद्भधुत ठदारता
836. सेवाका अवसर ही सौभाग्य है
837. नौकरके साथ उदार व्यवहार
838. भगवान्‌का विधान
839. सबर्में भगवद्दर्शन
840. ठीकरी पैसा बराबर न
841. शरीर का सदुपयोग
842. आत्मसम्बन्ध न
843. मेहतरके लिये पगड़ी
844. मन -आत्म प्रचार से विमुखता (श्रीहरिकृष्णदासजी गुप्त हरि )
845. (श्रीकृष्णगोपालजी माथुर ) नल
846. मुझे अशर्फियोंके थाल नहीँ, मुट्टीभर आटा चाहिये (भक्त श्रीरामशरणदासजी )
847. ब्रजवासियोंके टुकड़ोंमें जो आनन्द है, वह अन्यत्र कहीं नहों है
848. आदर्श बी ए बहू (पं श्रीरामनरेशजी त्रिपाठी)
849. श्रद्धा और मनोबलका चमत्कार (कविविनोद वैद्यभूषण पं श्रोठाकुरदत्तजी शर्मा ‘ वैद्य ‘)
850. चोरके साथ चोर
851. महाशक्ति ही पालिका हैं
852. शशास्त्रार्थ नहीं करूँगा
853. सच्चे महात्माके दर्शनसे लाभ (श्री सी एल भाटिया)
854. पाँच सेर भजन
855. विपत्तिका मित्र ( श्रीदोनानाथजी सिद्धात्तालंकार)
856. जाति-विरोधसे अनर्थ
857. सुख-दुःखका साथी
858. आदर्श मित्र
859. एक अनुभव ((श्रीरामरुद्रप्रसादर्सिहजी आई ए एस्)
860. कपोतकी अतिथि-सेवा
861. खूब विचारकर कार्य करनेसे ही शोभा है
862. मिथ्या गर्वका परिणाम
863. संकटमें बुद्धिमाती
864. बहुफतका सत्प
865. स्वतखताका मूल्य
866. बुरी योनियसे उद्धार आओ
867. सबमे भयंकर शत्रु-आलस्य
868. ममग्के मुख्रोंको अनिल्यला
869. अवनार-क था
870. ब्राफल्याकतर कया
871. बराक च्छकवनारकथा
872. त्रीवातहावनार-कचा
873. श्रोतृभिहावनारकचा
874. ईश्वर की तलाश – Seeking god
875. Life Vision Changing Story-Hindi Story
876. साधू और संत में अंतर – difference between monk and saint?
877. बहुमत का सत्य Truth of majority
878. आखिर क्यों भगवान राम ने विभीषण के अपराध का दंड भोगा – Not a generous world sat Katha Ank.
879. क्षय? – Decay?
880. ईश्वर की तलाश – Seeking God
881. संसार के सुखों की अनित्यता – Impermanence of the pleasures of the world
882. सत्यनिष्ठा का प्रभाव Integrity effect.
883. धन का घमंड अकेला कर देता है (आनंद) -Pride of wealth makes alone (bliss)
884. सेक्स एजुकेशन और भगवद गीता – Sex Education and Bhagavad Gita

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