Home Uncategorized भजन साभारी लोगों की दशा-११६

भजन साभारी लोगों की दशा-११६

0 second read
0
0
49

भजन साभारी लोगों की दशा-११६

मैं कैसे कहूं कोई न माने कही,

कीन सतनाम भजन यह विरंधा आय आय हरी।
आतम त्यागी पषाणहि पूजो धरि दुलहा दुलहिन,
किरबन आगे करता नीचे है अन्धेर यही।
पशु पक्षी को मार यज्ञ में होवे निज स्वारथ अबही
एक दिन तुझसे आया अचानक बदला लेय सही।
पाम कर्म करि सुख का चाहे यह कैसे निगही,
पार उतरना चाहे सिंधू ले स्वान की पूंछ गही।
कहै कबीर शहु में जो कुछ माने ठीक वही,
कौन न सुने कहि जग मेरा कहि हार्यो सबही।

Load More Related Articles
Load More By amitgupta
  • राग बिलाप-२७अब मैं भूली गुरु तोहार बतिया,डगर बताब मोहि दीजै न हो। टेकमानुष तन का पाय के रे…
  • राग परजा-२५अब हम वह तो कुल उजियारी। टेकपांच पुत्र तो उदू के खाये, ननद खाइ गई चारी।पास परोस…
  • शब्द-२६ जो लिखवे अधम को ज्ञान। टेकसाधु संगति कबहु के कीन्हा,दया धरम कबहू न कीन्हा,करजा काढ…
Load More In Uncategorized

Leave a Reply

Check Also

What is Master Series Group Master & How to Use in Busy

What is Master Series Group Master & How to Use in Busy Administration > Masters &g…