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“प्रभुका मार्ग वीरों के लिए है कायरों के लिए नहीं?”

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“प्रभुका मार्ग वीरों के लिए है कायरों के लिए नहीं?” 

जब महाराज युधिष्ठिर स्वर्गारोहण के लिए चले तो मार्ग में द्रोपदी व उनके चारों भाई उनसे पिछड़ गये । यद्यपि द्रोपदी व उनके भाई उन्हें पुकारते रहे परन्तु युधिष्ठिर आगे बढ़ते रहे। जब वे स्वर्ग के निश्चित द्वार पर पहुचे, तब उन्होंने अपने पास एक कुत्ते को खड़ा पाया। राजा को स्वर्ग के शिखर पर पहुंचा देखकर इन्द्र सत्य बनकर प्रकट हुए और उन्होंने युधिष्ठिर को सशरीर विमान में बैठाकर स्वर्ग में चलने का निमंत्रण दिया। | 
युधिष्ठिर ने कहा–यदि मेरे इस सत्य के साथी कुत्ते को भी साथ ले चलें तो में तैयार हू। इन्द्र ने कहा–ऐसा सम्भव नहीं है। कुत्ता स्वर्ग में केसे जा सकता है? जब यह मनुष्य बनकर इस सत्य के शिखर पर आयेगा तो स्वर्ग जा सकेगा, अभी तुम अकेले ही चलो। युधिष्ठिर बोले–यह कुत्ता मेरे दुख का साथी है। मेरी पत्नी व भाइयों ने मेरा साथ छोड़ दिया, परन्तु यह मेरे साथ लगा रहा। अब भला यह केसे सम्भव है कि यह बेचारा स्वर्ग सुख का साझीदार न बने? यह न्याय का तकाजा है, यदि ऐसा नहीं होता तो आपको भी कोई न्यायकारी कैसे मानेगा? अन्याय सहकर मुझे स्वर्ग जाना पसन्द नहीं। न्याय और सत्य के लिए यदि “प्रभुका मार्ग वीरों के लिए है कायरों के लिए नहीं?” 
जब महाराज युधिष्ठिर स्वर्गारोहण के लिए चले तो मार्ग में द्रोपदी व उनके चारों भाई उनसे पिछड़ गये । यद्यपि द्रोपदी व उनके भाई उन्हें पुकारते रहे परन्तु युधिष्ठिर आगे बढ़ते रहे। जब वे स्वर्ग के निश्चित द्वार पर पहुचे, तब उन्होंने अपने पास एक कुत्ते को खड़ा पाया। राजा को स्वर्ग के शिखर पर पहुंचा देखकर इन्द्र सत्य बनकर प्रकट हुए और उन्होंने युधिष्ठिर को सशरीर विमान में बैठाकर स्वर्ग में चलने का निमंत्रण दिया। | 
युधिष्ठिर ने कहा–यदि मेरे इस सत्य के साथी कुत्ते को भी साथ ले चलें तो में तैयार हू। इन्द्र ने कहा–ऐसा सम्भव नहीं है। कुत्ता स्वर्ग में केसे जा सकता है? जब यह मनुष्य बनकर इस सत्य के शिखर पर आयेगा तो स्वर्ग जा सकेगा, अभी तुम अकेले ही चलो। युधिष्ठिर बोले–यह कुत्ता मेरे दुख का साथी है। मेरी पत्नी व भाइयों ने मेरा साथ छोड़ दिया, परन्तु यह मेरे साथ लगा रहा। अब भला यह केसे सम्भव है कि यह बेचारा स्वर्ग सुख का साझीदार न बने? यह न्याय का तकाजा है, यदि ऐसा नहीं होता तो आपको भी कोई न्यायकारी कैसे मानेगा? अन्याय सहकर मुझे स्वर्ग जाना पसन्द नहीं। न्याय और सत्य के लिए यदि 
मुझे नरक में रहना पड़े तो अच्छा है। इसलिए है इन्द्रदेश! आप अगर सिधारिए, मुझे स्त्रर्ग नहीं चाहिए। 
, उनका ऐसा कहते ही कुत्ता वेष बदलकर सत्य का रूप धारण कर प्रकट हो गया | उसने महाराज युथिष्टिर की भूरि-भूरि प्रशंसा की और उन्हें अपने साथ स्वर्ग को ले गया
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