Home Bio-Graphy “पाब्लो पिकासो: एक जीवन कथा” (Pablo Picasso: Ek Jeevan Katha)

“पाब्लो पिकासो: एक जीवन कथा” (Pablo Picasso: Ek Jeevan Katha)

0 second read
0
0
43

पाब्लो पिकासो, 20वीं सदी के सबसे प्रसिद्ध और प्रभावशाली कलाकारों में से एक, का जन्म 25 अक्टूबर 1881 को स्पेन के मलागा शहर में हुआ था। पिकासो को उनकी चित्रकला, मूर्तिकला और कला के विभिन्न रूपों में उनके योगदान के लिए जाना जाता है। वे क्यूबिज़्म के सह-संस्थापक और आधुनिक कला के एक प्रमुख प्रवर्तक थे।

पाब्लो पिकासो का पूरा नाम पाब्लो डिएगो होज़े फ्रांसिस्को डी पाउला जुआन नेपोमुसैनो क्रिसपिन क्रिस्पिनियानो मारिया रेमेडियोज डे ला सांटिसिमा त्रिनिदाद मार्तीर पट्रिसियो क्लितो रूइज़ पिकासो था। उनके पिता, जोस रुइज़ बास्को, एक चित्रकार और कला शिक्षक थे, जिन्होंने पिकासो को शुरुआती कला शिक्षा दी। पिकासो ने बहुत ही कम उम्र में अपनी कला प्रतिभा का प्रदर्शन करना शुरू कर दिया था और उन्होंने अपने पिता से कला की बारीकियाँ सीखीं।

picasso

पिकासो ने बार्सिलोना के ला लोन्जा स्कूल ऑफ़ फाइन आर्ट्स में दाखिला लिया और अपनी औपचारिक कला शिक्षा प्राप्त की। बाद में वे मैड्रिड के रॉयल एकेडमी ऑफ़ सेंट फर्नांडो में भी पढ़े।

पिकासो ने अपने कैरियर की शुरुआत 19वीं सदी के अंत और 20वीं सदी की शुरुआत में की। उनकी प्रारंभिक कला शैली में उन्होंने पारंपरिक अकादमिक कला के सिद्धांतों का पालन किया, लेकिन जल्दी ही उन्होंने अपनी स्वयं की अनूठी शैली विकसित करना शुरू कर दिया।

1901 से 1904 तक, पिकासो का “नीला काल” चला, जिसमें उन्होंने उदासी और निराशा की भावना को चित्रित किया। इस अवधि के उनके चित्रों में प्रमुखता से नीला रंग प्रयोग हुआ। इसके बाद, 1904 से 1906 तक उनका “गुलाबी काल” चला, जिसमें उन्होंने गुलाबी और नारंगी रंगों का उपयोग किया और विषयवस्तु में सर्कस कलाकारों और हार्लेक्विन्स को शामिल किया।

1907 में, पिकासो ने अपने मित्र जॉर्ज ब्रैक के साथ मिलकर क्यूबिज़्म नामक कला आंदोलन की शुरुआत की। क्यूबिज़्म में वस्त्रों और मानव आकृतियों को ज्यामितीय रूपों में विभाजित किया गया। उनकी पेंटिंग “लेस डेमोइसेल्स डी’विग्नन” (1907) क्यूबिज़्म की शुरुआत का प्रतीक मानी जाती है।

क्यूबिज़्म ने पारंपरिक कला के सभी मानकों को चुनौती दी और आधुनिक कला की नींव रखी। इस शैली ने पिकासो को वैश्विक मान्यता दिलाई और उन्हें कला की दुनिया में एक प्रतिष्ठित स्थान दिलाया।

1937 में, पिकासो ने अपने सबसे प्रसिद्ध कार्यों में से एक “गुएर्निका” बनाई। यह चित्र स्पेन के गुएर्निका शहर पर हुए हवाई हमले की त्रासदी को दर्शाता है। “गुएर्निका” को युद्ध की भयावहता और मानव पीड़ा का प्रतीक माना जाता है। यह पिकासो की राजनीतिक और सामाजिक चेतना को भी उजागर करता है।

द्वितीय विश्व युद्ध के बाद, पिकासो ने विभिन्न कला शैलियों और माध्यमों का प्रयोग जारी रखा। उन्होंने सिरेमिक, मूर्तिकला और प्रिंटमेकिंग में भी काम किया। पिकासो का रचनात्मकता का स्तर अनवरत बना रहा और उन्होंने अपने जीवनकाल में हजारों कलाकृतियाँ बनाईं।

पिकासो ने चार शादियाँ कीं और उनके कई बच्चे थे। उनकी जीवनशैली बोहेमियन थी और उन्होंने अपने जीवन के विभिन्न चरणों में कई महिलाओं के साथ संबंध बनाए।

8 अप्रैल 1973 को पाब्लो पिकासो का निधन फ्रांस के मौगिन्स में हुआ। उनकी मृत्यु के बाद भी उनकी कला का प्रभाव और महत्त्व कम नहीं हुआ। पिकासो की कला ने आधुनिक कला को एक नई दिशा दी और उनकी रचनाएँ आज भी संग्रहालयों और कला दीर्घाओं में प्रदर्शित होती हैं।

पिकासो की विरासत आज भी जीवित है और उनकी कला ने नई पीढ़ियों को प्रेरित किया है। वे एक ऐसे कलाकार थे जिन्होंने अपने समय की सीमाओं को पार किया और कला के माध्यम से मानवता की भावना को चित्रित किया।

पाब्लो पिकासो का जीवन और कार्य एक अद्वितीय यात्रा का उदाहरण है। उनकी अनूठी दृष्टि, नवाचार और रचनात्मकता ने उन्हें इतिहास के सबसे महान कलाकारों में से एक बना दिया है। उनकी कला ने न केवल कला की दुनिया में, बल्कि समाज और संस्कृति में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है। पिकासो का नाम सदैव कला के क्षेत्र में स्वर्णाक्षरों में लिखा जाएगा।

Load More Related Articles
Load More By Niti Aggarwal
Load More In Bio-Graphy

Leave a Reply

Check Also

“एल्विस प्रेस्ली: एक जीवन कहानी” (Elvis Presley: Ek Jeevan Kahani)

एलविस आरोन प्रेस्ली का जन्म 8 जनवरी 1935 को मिसिसिपी के टूपेलो में हुआ था। उनके माता-पिता …