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धोरवे बाज

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धोरवे बाज

एक बार की बात है कि एक लड़का कुँए पर बैठकर रोने लगा। एक आदमी ने उससे रोने का कारण पूछा। 
लड़का बोला–श्रीमान जी! मेरे हाथ से तांबे का एक कलश छूटकर इस कुंए में गिर पड़ा है। जब में कुए में झाँकने लगा तो मेरी बहुमूल्य टोपी भी इसमें गिर गई। मेरे रोने का यही कारण है। 
यदि कोई मेरी दोनों चीजों को निकाल दे तो उसकी इच्छानुसार उनमें से एक वस्तु मैं उसे दे दूंगा। 
उस लड़के की बात सुनकर उस आदमी ने अपने कपड़े उतार कर, रस्सी के सहारे कुए में उतर गया और पानी में बार बार गोते लगांकर उसके कलश और टोपी को ढूढ़ने लगा। 
जब बहुत परिश्रम करने पर भी उसे दोनों में से कोई भी वस्तु न मिली तो वह हारकर बड़ी मुश्किल से ऊपर आया। 
जब वह बाहर आया तो उसके कपड़े और लड़के का दूर-दूर तक पता नहीं था। यह देखकर उसके दुःख और आएचर्य की कोई सीमा न थी। इस प्रकार वह हाथ मलता हुआ घर को चल पड़ा। | 
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