Home Uncategorized “दानी कोई और है”!

“दानी कोई और है”!

2 second read
0
0
21
एक साहूकार प्रतिदिन दान किया करता था। एक दिन एक भिखारी उसके यहाँ दान माँगने आया। वह बारबार दरवाजे पर जाकर और आवाज बदल-बदल कर दान ले आता था। 
अन्तिम बार जब भिक्षुक साहूकार के यहाँ गया तो वह बोला–आप दान तो देते हैं परन्तु एक गलती करते हैं, आप ऊपर की ओर नहीं देखते, नीचे की ओर ही देखते रहते हैं। आपके पास से माँगने वाले प्रतिदिन कई-कई बार दान ले जाते हैं। में आज आपसे स्वयं पाँच बार दान ले गया हूँ। साहूकार बोला–यह धन मेरा नहीं है। दान देने वाला तो कोई और ही है। लोग मुझे ही दाता कहते हैं। इस कारण से मैं लज्जित होकर ऊपर नहीं देख पाता। 
Load More Related Articles
Load More By amitgupta
  • राग बिलाप-२७अब मैं भूली गुरु तोहार बतिया,डगर बताब मोहि दीजै न हो। टेकमानुष तन का पाय के रे…
  • राग परजा-२५अब हम वह तो कुल उजियारी। टेकपांच पुत्र तो उदू के खाये, ननद खाइ गई चारी।पास परोस…
  • शब्द-२६ जो लिखवे अधम को ज्ञान। टेकसाधु संगति कबहु के कीन्हा,दया धरम कबहू न कीन्हा,करजा काढ…
Load More In Uncategorized

Leave a Reply

Check Also

How to Check BUSY Updates

How to Check BUSY Updates Company > Check BUSY Updates Check BUSY Updates option provid…