Home Uncategorized कबीर भजन राम बिलावल -१२०

कबीर भजन राम बिलावल -१२०

3 second read
0
0
22
कबीर भजन राम बिलावल -१२०
योगी या विभि मन को लगावें। टेक
जैसे नटनी चढ़े बांस पर,
नटवा ढोल बजावें ॥
सारा बोझ बांस सिर ऊपर,
सुरत बासे बाँधे
जैसे सखी जाय पनघट पर,
सिर धरि गागरि लावै
सखियां संग सूरति गगारि में,

अम्बर चिर नहि जाये ।
जैसे लोहार कूटत लोहे को,
अइसण फूंक लगावे। 
ऐसो चोर लगे घट अन्दर,
माया रह न पाये। 
जाग सुगति से आसन मारे,
उलटी पवन चलाये। 
कष्ट आपदा सबही संहारे,
नजर से नजर मिलाये।
जैसे मकरी तार अपनी,
उलटि-पुलटि चढ़ जाये ।
कहे कबीर सुनो भाई साधो,
वाहि में उलटि समझा।

Load More Related Articles
Load More By amitgupta
  • राग बिलाप-२७अब मैं भूली गुरु तोहार बतिया,डगर बताब मोहि दीजै न हो। टेकमानुष तन का पाय के रे…
  • राग परजा-२५अब हम वह तो कुल उजियारी। टेकपांच पुत्र तो उदू के खाये, ननद खाइ गई चारी।पास परोस…
  • शब्द-२६ जो लिखवे अधम को ज्ञान। टेकसाधु संगति कबहु के कीन्हा,दया धरम कबहू न कीन्हा,करजा काढ…
Load More In Uncategorized

Leave a Reply

Check Also

How to Check BUSY Updates

How to Check BUSY Updates Company > Check BUSY Updates Check BUSY Updates option provid…