Home Uncategorized कबीर भजन राग बागेश्नरी १३६

कबीर भजन राग बागेश्नरी १३६

0 second read
0
0
19
कबीर भजन राग बागेश्नरी १३६
भजन कर बोली जगत धरी टेक
भुई में गिरी हवा जब लागी माया अमल करो
पियत क्षीर मुस्काति मनहीं,
मन किलकतु कठिन करी।
खेलत खेल गलिन में झूमे चर्चा और सिरी,
ज्वान भए वरुणी संग सोते अब कह क्या संवरो,
दक्षिण दिशा छियासी योजन यम राजा नगरी,
जो मन चलत शल बहु लागै बेत ले बात करी
भोजन आगे पार बरनणी, उत्तर जब जैहो,
चित्रगुप्त तब बेमा मांगे जाए कहां वहां करी,
कहे कबीर सुनो भाई साधो सतगुरु पार करो।
Load More Related Articles
Load More By amitgupta
  • राग बिलाप-२७अब मैं भूली गुरु तोहार बतिया,डगर बताब मोहि दीजै न हो। टेकमानुष तन का पाय के रे…
  • शब्द-२६ जो लिखवे अधम को ज्ञान। टेकसाधु संगति कबहु के कीन्हा,दया धरम कबहू न कीन्हा,करजा काढ…
  • राग परजा-२५अब हम वह तो कुल उजियारी। टेकपांच पुत्र तो उदू के खाये, ननद खाइ गई चारी।पास परोस…
Load More In Uncategorized

Leave a Reply

Check Also

How to Check BUSY Updates

How to Check BUSY Updates Company > Check BUSY Updates Check BUSY Updates option provid…