Home Aakhir Kyon? “एस. डी. बर्मन: जीवन और संगीत की धुन” (S.D. Burman: Jeevan aur Sangeet ki Dhun)

“एस. डी. बर्मन: जीवन और संगीत की धुन” (S.D. Burman: Jeevan aur Sangeet ki Dhun)

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सचिनदेव बर्मन, जिन्हें एस. डी. बर्मन के नाम से भी जाना जाता है, एक प्रमुख भारतीय संगीतकार और संगीत निर्देशक थे। उनका जन्म 1 अक्टूबर, 1906 को कोलकाता, ब्रिटिश भारत (अब कोलकाता, भारत) में हुआ था और उनका निधन 30 एप्रिल, 1975 को मुंबई, महाराष्ट्र में हुआ था।

एस. डी. बर्मन ने भारतीय संगीत के क्षेत्र में अपना अद्वितीय योगदान दिया। उनके संगीत के शैली और व्यापक ज्ञान ने उन्हें उत्कृष्ट संगीतकार के रूप में माना जाता है।

SD Burman 2022

सचिनदेव बर्मन का संगीत करियर 1935 में शुरू हुआ, जब उन्होंने बंगाली फिल्म “प्रधान” के लिए संगीत निर्देशन किया। उनका पहला हिंदी फिल्मी गाना “मैं खोया खोया रहता हूँ” फिल्म “मुगल-ए-आज़म” में था, जो 1951 में रिलीज़ हुई थी।

सचिनदेव बर्मन का बॉलीवुड में संगीत निर्देशन करने का सफर लंबा और सफल रहा। उन्होंने अपनी क्षमता के बल पर एक से बढ़कर एक हिट गाने प्रस्तुत किए। उनके गानों में भावनाओं की गहराई और संगीत की शानदारता को सराहा गया।

सचिनदेव बर्मन को “मेलोडी किंग” के रूप में भी जाना जाता है, क्योंकि उनके संगीत की मेलोडियां लोगों के दिलों में बस जाती थीं। उनके संगीत का प्रभाव बॉलीवुड में अद्वितीय रहा है और उनकी यादें हमेशा हिंदी सिनेमा के इतिहास में बनी रहेंगी।

सचिनदेव बर्मन को उनके योगदान के लिए कई पुरस्कार और सम्मान प्राप्त हुए, जिसमें राष्ट्रीय पुरस्कार, फिल्मफेयर पुरस्कार, फिल्म फेयर पुरस्कार, फिल्म फेयर पुरस्कार, आदि शामिल हैं। उन्होंने भारतीय संगीत संगठनों के साथ भी अपनी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

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