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साल 2015 की पॉजिटिव स्टोरीज, जो दुनिया के लिए बनीं मिसाल || Year 2015 Hindi Positive Stories ||

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साल 2015 की पॉजिटिव स्टोरीज, जो दुनिया के लिए बनीं मिसाल

Hindi Positive Stories Of 2015
: इस साल दुनिया ने कई हादसों के चलते बुरे दौर का सामना किया, तो साथ ही
कई जगहों से सुकून देने वाली खबरें भी आईं। शरणार्थी संकट का दुनियाभर के
देशों ने मिलकर न सिर्फ सामना किया, बल्कि इसका हल निकालने के लिए भी कदम
उठाए गए। सऊदी में पहली बार महिलाओं ने चुनाव लड़ा भी और जीत भी हासिल की।
हम आपको साल 2015 की कुछ ऐसी ही पॉजिटिव स्टोरीज के बारे में बता रहे है।
1. पेन बेचता सीरियाई पिता: अब्दुल हमीद
कैंपेन से मिली 1 करोड़ 27 लाख रु. की मदद

1. पेन बेचता सीरियाई पिता: अब्दुल हमीद

लेबनान में बेरूत की सड़कों पर सीरियाई शरणार्थी अब्दुल हमीद की बेटी को
कंधे पर लिए पेन बेचने की फोटो वायरल हुई। ये फोटो नार्वे के ओस्लो की
रहने वाली सोशल एक्टिविस्ट गिसर सिमोनावर्सन ने अपने ट्विटर अकाउंट पर शेयर
करने के साथ लोगों से मदद की अपील की। गीसर ने दो बच्चों वाले अब्दुल के
परिवार के लिए क्राउंड फंडिंग पेज बनाया, जिसके जरिए पांच हजार डॉलर (तीन
लाख 30 हजार रुपए) जमा करने का लक्ष्य रखा गया। इस अभियान के शुरू होने के
30 मिनट के अंदर ही पांच हजार डॉलर की राशि जमा हो गई। 24 घंटे के अंदर
3,000 लोगों ने अब्दुल के लिए 80 हजार डॉलर (करीब 52 लाख रुपए) से ज्यादा
दान कर दिए। इस कैंपेन ने 1 करोड़ 27 लाख रुपए की रकम जोड़ दी। अब अब्दुल
इस मदद की रकम से बेरूत में अपने तीन बिजनेस शुरू कर चुके हैं।

2. सऊदी में महिलाओं का लोकतंत्र
20 महिला कैंडिडेट्स ने जीता चुनाव

2. सऊदी में महिलाओं का लोकतंत्र

सऊदी अरब में 12 दिसंबर को पहली बार महिलाओं ने चुनाव लड़ा और जीता। 2100
म्यूनिसिपल काउन्सिल सीटों पर चुनाव हुए। 978 महिला कैंडिडेट में से 20 ने
इस चुनाव में जीत हासिल की। मक्का के मदरकाह गांव में सलमा बिंत हिजब अल
ओतीबी चुनाव जीतने वाली पहली महिला उम्मीदवार बनीं। इस चुनाव में ही पहली
बार महिलाओं को वोट डालने का भी अधिकार मिला था। वोट देने के लिए 131,000
महिलाओं ने अपना नाम रजिस्टर्ड कराया था।
3. रिफ्यूजी संकट: देशों ने खोले बॉर्डर
यूरोपीय कमीशन ने बनाई नई पॉलिसी

3. रिफ्यूजी संकट: देशों ने खोले बॉर्डर

इराक, सीरिया, अफगानिस्तान और अफ्रीकी देशों में छिड़े संघर्ष के चलते
यूरोपीय देशों ने जबरदस्त शरणार्थी संकट का सामना किया। इन देशों से लगातार
पहुंच रहे शरणार्थियों के चलते हंगरी में हालात बिगड़े तो ऑस्ट्रिया,
फिनलैंड और जर्मनी ने इनके लिए अपने देश के बॉर्डर खोले। इधर, यूरोपीय
कमीशन ने रिफ्यूजी संकट से निपटने के लिए नई पॉलिसी का एलान कर दिया। कमीशन
ने यूरोप में कुल 1,60,000 रिफ्यूजियों को पनाह देने की बात कही। इसके लिए
कोटा तय किया और जिसे मानने के लिए देश बाध्य थे। यूरोस्टैट और ईयू मेंबर
स्टेट्स के मुताबिक, 2015 के शुरुआती 9 महीनों में ही ईयू के सदस्य देशों
को शरण के लिए 812,705 नए एप्लिकेशन मिल चुके थे।
4. जब सिख ने उतारी पगड़ी
खून से लथपथ बच्चे की जान बचाने के लिए उठाया कदम

न्यूजीलैंड में मई में एक सुकून देने वाली खबर सामने आई। यहां हरमनप्रीत
नाम के सिख युवक ने धार्मिक मान्यताओं से बढ़कर इंसानी जिंदगी को तरजीह दी।
सड़क हादसे में घायल बच्चे का खून बहता देख उसने मदद के लिए अपनी पगड़ी
खोल दी। इसके बाद सोशल मीडिया पर युवक की फोटो वायरल हो गई। लोगों ने उसके
इस कदम की जमकर तारीफ की। बाद में न्यूजीलैंड पुलिस ने उस को अवॉर्ड देकर
सम्मानित भी किया।
5. फेस ट्रांसप्लान्ट सर्जरी
दूसरे के शरीर पर देखा अपने भाई का चेहरा

5. फेस ट्रांसप्लान्ट सर्जरी

मैरीलैंड की रहने वाली रेबेक ने वर्जीनिया में रिचर्ड नोरिस नाम के उस शख्स
से पहली बार मुलाकात की, जिसे ट्रांसप्लान्ट के जरिए उसके भाई का चेहरा
लगाया गया था। तीन साल पहले रेबेक का भाई जोशुआ एवेरसानो की कार एक्सीडेंट
में मौत हो गई थी। रेबेक के परिवार ने डॉक्टरों को जोशुआ का चेहरा दान करने
की अनुमति दे दी। इसके बाद ट्रांसप्लान्ट सर्जरी की मदद से जोशुआ का चेहरा
वर्जीनिया के रिचर्ड के शरीर से जोड़ा जा सका। 150 डॉक्टरों और नर्सों की
टीम ने इस सर्जरी को 36 घंटे में अंजाम दिया था।
6. MIRACLE BABY: जैक्सन ब्यूएल
मां से पहले शब्द- आय लव यू

6. MIRACLE BABY: जैक्सन ब्यूएल

मिरेकल बेबी के नाम से मशहूर फ्लोरिडा का जैक्सन ब्यूएल इस साल फिर चर्चा
में रहा। डॉक्टरों ने आधे सिर के साथ जन्मे जैक्सन के बचने की उम्मीद से भी
इनकार कर दिया था। वहीं, मौत को मात देते हुए 27 अगस्त को उसने अपना पहला
बर्थडे मनाया। इस दौरान जैक्सन का अपनी मां के लिए निकला पहला ‘आय लव यू’
था। वह अब सहारा लेकर खड़ा होना और चलना भी सीख रहा है। न्यूरो की अजीबोगरीब
बीमारी से पीड़ित यह बच्चा पूरी दुनिया के लिए खास है। उसके सिर का एक
हिस्सा जन्म से ही विकसित नहीं हुआ।
7. म्यांमार चुनाव
देश में 25 साल बाद लोकतांत्रिक चुनाव

7. म्यांमार चुनाव

म्यांमार में नवंबर में 25 साल के लंबे अंतराल के बाद ऐतिहासिक संसदीय
चुनाव हुए। कई साल तक नजरबंद रहीं विपक्ष की नेता आंग सान सू की पार्टी ने
इस संसदीय चुनाव में जीत हासिल की। देश का भविष्य तय करने वाले इस चुनाव को
म्यांमार के इतिहास का सबसे अहम चुनाव माना गया।
8. ब्रिटेन की यंगेस्ट ऑर्गन डोनर

74 मिनट जिंदा रहने वाली बच्ची बनी सबसे छोटी डोनर8. ब्रिटेन की यंगेस्ट ऑर्गन डोनर

ब्रिटेन में महज 74 मिनट तक जिंदा रहने वाली बच्ची होप ली दिसंबर में सबसे
छोटी ऑर्गन डोनर बन गई। होप के डेड ब्रेन और स्कल की खराब स्थिति के चलते
बचने की उम्मीद न के बराबर थी। लिहाजा, न्यूमार्केट के रहने वाले होप के
पेरेन्ट्स इम्मा और एंड्रयू ली ने उसके अंग डोनेट करने का फैसला किया और
उसकी किडनी डोनेट कर दी।

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