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रामायण एक महाकाव्य

रामायण

नए साल की प्रतिपदा से नौ दिन तक रामायण का पाठ करना चाहिए अगर आपसे ना हो तो ब्राह्मण से करवा लें। नौ दिन तक रोज रामचन्द्र जी की और रामायण की पूजा करनी चाहिए। चैत्र शुक्ला एकम्‌ को हिन्दू संस्कृति एवं धर्मानुसार नववर्ष होता है। इसी दिन नवरात्रि स्थापना भी होती है। सभी व्यापारी वर्ग नवीन वर्ष में नए बही-खाते का प्रारंभ  करते हैं। नीमजर, कालीमिर्च, सूंठ, धणिया साबुत, मिश्री मिलाकर प्रसाद रूप खायें।

एकम्‌ से राम नवमी तक नौ दिन के नवतात्रा होते हैं। नौ दिन तक रामचन्द्र जी और रामायण की पूजा व पाठ किया जाता है। जल,रोली, मोली, अक्षत, पुष्प, धूप, दीप, कपूर, सुपारी, पान, लौंग, इलाइची,फल, दक्षिणा एवं प्रसाद चढ़ावें एवं पूजन सम्पन्न करें। भोग लगाकर रामायण का पाठ करे।
Ramayana
पाठ पूरा होने तक दीपक जलाना चाह़िये। जल, मौली (कलावा), रोली, चावल, फूल, प्रमाद, धूप तथा दीपक दिखाकर कपूर, दक्षिणा, पान-सुपारी, लौंग, इलायची और फूल चढाकर आरती करनी चाहिए। रामायण समाप्त होने के बाद रामनवमी के दिन रामचन्द्र जी की और रामयण की पूजा तथा आरती करनी चाहिए और प्रसाद भी बांटना चाहिए। और स्वयं भी प्रसाद ग्रहण करें।

 पूरे वर्ष परिवार सुखशांति तथा धन-धान्य से परिपूर्ण रहे, इसके लिए आवश्यक है कि हम नववर्ष के दिन शोक विषाद से रहित होकर आनन्द के साथ आज का दिन बिताए। हम हिन्दू हैं, अत: हमें चाहिए कि नववर्ष के दिन अपने घरों के दरवाजों पर आम और अशोक के पत्तों की बन्दनवारें लगाएं तथा घरों को सजाएं। नव वर्ष के स्वागत में मकानों के ऊपर गेरूए रंग की धर्म-ध्वजाएं भी हमें फहरानी चाहिए।
ब्राह्मणों, गुरूजनों और अपने से बडों को प्रणाम करके उनसे आशीर्वाद तो हमें लेना ही चाहिए, नव वर्ष का पचांग सुनने का भी विशिष्ट धार्मिक महत्व है। इसके लिए उचित तो यही है कि नए वर्ष का पचांग अथवा जन्त्री पहले ही घर लाकर रख ली जाए ओर उसे आज के दिन स्वयं पढ़ा जाए अथवा कोई पण्डित बुलाकर उससे सुना जाए।
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