Home Did You Know? जीवन में पांच तरह के सुख और पांच ही तरह के दुख-Five types of happiness and five kinds of sorrows in life

जीवन में पांच तरह के सुख और पांच ही तरह के दुख-Five types of happiness and five kinds of sorrows in life

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Happiness Misery quotes in Hindi
जीवन में पांच तरह के सुख और पांच ही तरह के दुख
समाज में हर तरह के विचार के व्यक्ति होते हैं। कुछ पैसे की नज़र से ही हर स्थिति, परिस्थिति और व्यक्तियों को देखते हैं। कुछ शारीरिक नज़र से हर समय, हर किसी को परखते हैं। कुछ लोग भावुकता के पलड़े में सबको तौलते हैं। बुद्धि से विचार करने वाले तो कम ही होते हैं और सबसे कम होते हैं अध्यात्म की नज़र से संसार को देखने वाले। इसका अर्थ धार्मिक नज़र नहीं, जीवन को यथार्थ से देखना।
Sukh Dukh quotes in Hindi सुख दुःख पर अनमोल वचन - Net In Hindi.com
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इस संसार में पांच तरह के सुख हैं। धन का, तन का, मन का, बुद्धि तथा अध्यात्म का। आपने मिठाई खरीदी तो धन का सुख, खाई तो तन का सुख, पोते-पोती को दी तो मन का सुख, स्कूल में प्रथम आए तो बुद्धि का सुख इत्यादि। परंतु प्रभु का ध्यान अाध्यात्मिक सुख के क्षेत्र में आता है। ज़रा दिमाग के घोड़ों को और दौड़ाएं तो पाएंगे कि पांच तरह के दु:ख भी होते हैं। आपके हजार रुपए खोए तो धन का दु:ख, शरीर का कोई अंग खराब हो गया तो तन का दु:ख, छोटी उम्र में परिवार में कोई व्यक्ति गुज़र गया तो मन का दु:ख, पर कोई व्यक्ति परिवार में मानसिक संतुलन खो गया तो बुद्धि का दु:ख, परंतु सबसे बड़ा दु:ख जो बहुत कम लोगों को होता है, वह है अध्यात्म का दु:ख। अध्यात्म
दु:ख अपने आप को न जान पाना है। आम आदमी आध्यात्मिक नज़र से जीवन देखता नहीं तो उसे इस दु:ख का पता भी नहीं है।
अध्यात्म की नज़र से देखें तो वास्तविकता में न सुख है न दु:ख है। सुख-दु:ख तो मात्र एक विचार है। एक के लिए एक घटना दु:ख का संदेश लाती है, तो दूसरे के लिए वही घटना भावी सुख की आहट देती है। अब हम बात करेंगे मीडिया में आई खबरों पर। नि:संदेह हमें खबरों को हर स्तर से देखना चाहिए। पैसा, स्वास्थ्य, परिवार, समाज, ये हमारे अभिन्न अंग हैं। परंतु सबसे विशाल तो अध्यात्म का पहलू है। यह मानना बचकाना होगा कि हर खबर सिर्फ एक स्तर पर हिट होती है। हर खबर का असर व्यापक होता है। वह नज़र बाद में आए पर उसकी पहुंच बहुत ऊंची और गहरी होती है।
एक ख़बर दु:खदायी मालूम पड़ती है। परंतु उससे अनेक लोगों को सुख मिलता होगा और शायद एक ख़बर सुखदायी मालूम पड़ती हो लेकिन उससे अनेक लोगों के घर में दु:ख का माहौल हो जाता होगा। बात गहरी है, इसको ज़रा ध्यान से पढ़िएगा। हर ख़बर को साक्षी भाव से देखिए। तो उतनी परेशानी नहीं होगी, जितनी बनाई जाती है। उदाहरण के लिए शहर में डेंगू फैला। यह ख़बर दु:खदायी महसूस होती है परंतु इस घटना से कितने लोगों की ज़िंदगी बन जाएगी। बकरी का दूध, पपीता बेचने वालों की, डॉक्टरों की, लैब वालों की और उनके साथ अनेक लोगों की जबर्दस्त कमाई हो जाएगी।
अक्सर सोचता हूं कि अंतिम संस्कार का सामान बेचने वाले के घर खुशी कब आती होगी। वह भी गल्ले की आरती करता होगा तो कहता होगा कि ‘सुख-संपत्ति घर आवे’। कब आएगी उसके घर में सुख-संपत्ति? जब शहर में ज्यादा मृत्यु होंगी, इसलिए हर ख़बर को मात्र एक नज़र से मत देखिए। सांसारिक ख़बर पर आध्यात्मिक नज़र भी रखनी चाहिए। एक बार आपने साक्षी भाव से संसार की हर ख़बर को देखना शुरु कर दिया तो भयंकर से भयंकर दु:ख में भी आप डोलेंगे नहीं। सोचिएगा इस बात पर!
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